पाठ्यक्रम के दोष - paathyakram ke dosh

पाठ्यक्रम के दोष - Defects of Curriculum

पाठ्यक्रम निर्माताओं द्वारा वर्तमान में तेजी से होने वाले परिवर्तनों के कारण कुछ कमियां या दोष रह जाते हैं जो निम्नलिखित हैं:

1. पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों के सम्मुख बड़ी और कठिन मात्रा में विषय वस्तु प्रस्तुत की जाती है चाहे विद्यार्थी में उसे ग्रहण करने की क्षमता हो या ना हो|

2. पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को वास्तविक तथा सामाजिक जीवन से अलग कर देता है क्योंकि उनमें जीवन के साथ संबंधों का अभाव होता है|

3. पाठ्यक्रम बालकों के आवश्यकताओं का ध्यान नहीं रखता तथा उन्हें अपने प्राकृतिक शक्तियों के विकास का पूर्ण अवसर नहीं देता है|

4. पाठ्यक्रम में क्रिया प्रधानता की पर्याप्त मात्रा का अभाव होता है|

5. पाठ्यक्रम जनतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं बनाया जाता है|

6. पाठ्यक्रम निर्माण के समय पाठ्यक्रम निर्माताओं द्वारा व्यक्तिगत विभिन्नता तथा पूर्व निर्धारित उद्देश्यों का ध्यान नहीं रखा जाता है|

7. पाठ्यक्रम में परीक्षाओं को अधिक महत्व दिया जाता है|

8. पाठ्यक्रम को अत्यंत सैद्धांतिक व पुस्तकिय बनाया जाता है| इसमें वास्तविकता तथा व्यवहारिकता का पूर्ण अभाव होता है|

9. पाठ्यक्रम में व्यवसायी तथा तकनीकी प्रशिक्षण नहीं मिलता है|

10. पाठ्यक्रम में प्रायोगिक कार्य एवं दैनिक जीवन से संबंध का आभाव होता है|

11. पाठ्यक्रम में अमनौ वैज्ञानिक एवं असृजनात्मक क्रियाओं का अभाव होता है|

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