नगरीकरण और आर्थिक परिवर्तन का बालक के अनुभवों पर प्रभाव - nagareekaran aur aarthik parivartan ka baalak ke anubhavon par prabhaav

नगरीकरण और आर्थिक परिवर्तन का बालक के अनुभवों पर प्रभाव - The impact of urbanization and economic change on the child's experiences

नगरीकरण और आर्थिक परिवर्तन के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार के प्रभाव बालकों के निर्माण और अनुभव में हो सकते हैं| इनसे सामाजिक आदर्शों का विचलन (Diversion) होता है| यदि यह आदर्श प्रभावी दिशा में विचलित होते हैं| यदि ये आदर्श प्रभावी दिशा में विचलित होते है तो बालकों का उन्नत विकास और रचनात्मक अनुभव प्राप्त होते हैं| परंतु यदि आदर्शों का विचलन विघटनकारी होता है तो बालक ऐसा रूप धारण करता है कि उसका व्यवहार और व्यक्तित्व (behavior and personality) सामाजिक समस्या के रूप में खड़ा हो जाता है| बालक सामाजिक मूल्यों की उपेक्षा तथा परंपराओं रीति-रिवाजों आदि की अवहेलना करने लगता है| वह वरिष्ट व्यक्तियों के नियंत्रण को स्वीकार नहीं करता, कमजोर वर्ग के बालकों पर नगरीकरण और आर्थिक परिवर्तन के घातक प्रभाव पड़ते हैं जिन्हें निम्न प्रकार से इंगित किया जा सकता है-

गंदी बस्तियों का प्रभाव (Impact of slum area)- 

औद्योगिकरण के तीव्र विकास ने नगरों में गंदी बस्तियों का को निमंत्रण दिया है| जैसे कानपुर के अहाते, कलकत्ता की बस्तियां और मुंबई के चाल आदि| इन बस्तियों की दशाएं बहुत ही गंदी और अस्वस्थकर होती है और इन अस्वस्थकर में रहने से बालक बचपन से संक्रामक बीमारियों के चपेट में आ जाते हैं और इनका विकास अवरुद्ध हो जाता है| 

अतृप्त इच्छाओं का प्रभाव (Impact of unsatisfied feeling)- 

निर्धन परिवार के बच्चों की अनेक इच्छाएं अतृप्त रह जाती हैं| अतः कभी-कभी वे अपनी अतृप्त इच्छाओं की पूर्ति के लिए अपराधी व्यवहार करते हैं| बच्चों को पढ़ने की सुविधाएं नहीं होती वे बालक श्रमिक का कार्य करने लगते हैं| तथा वहां के असंतोषजनक स्थितियां उन्हें अपराधी बना देती है| बदलती आर्थिक संरचना में निर्धन परिवारों के माता-पिता दोनों काम करने जाते हैं| अतः वहां बच्चों पर उचित नियंत्रण नहीं रहता| अतः बच्चे अपराधी व्यवहार सीख जाते हैं| कई बार माता-पिता स्वयं अपराधी व्यवहार करते हैं| अतः उनके बच्चे भी आवश्यकता की पूर्ति के लिए अपराध की ओर मुड़ जाते हैं|

औद्योगिक बेरोजगारी का प्रभाव (Impact of Industrial Unemployment)-

नगरीकरण और आर्थिक परिवर्तन औद्योगिकरण है| जैसे जैसे औद्योगिकरण का विकास होते जा रहा है वैसे-वैसे औद्योगिक क्षेत्र में बेरोजगारी की समस्या बढ़ती जा रही है| भारत में बड़े-बड़े उद्योग धंधों की स्थापना प्रमुखतः नगरों में हुई है| अतः नगरों में बेरोजगार हुए माता-पिता के बच्चे अचानक शिक्षा से वंचित रह जाते हैं| और अपराधी व्यवहार करने लग जाते हैं जिससे वे मानसिक अस्वस्थता (mental illness) के शिकार हो जाते हैं|  

शारीरिक श्रम के प्रति हिनता की मनोवृति (Tendency of infuriate feelings about the physical labour)- 

भारत में दफ्तर में बैठकर कार्य करने को या अन्य प्रकार के बौद्धिक कार्यों से जुड़े होने को प्राथमिकता दी जाती है| माता-पिता अपने बच्चों के विकास और शिक्षा पर ऐसा दबाव बनाते हैं कि स्वाभाविक विकास अवरुद्ध होने लगता है|

सामाजिक अव्यवस्था का प्रभाव (Impact of social status)- 

आर्थिक परिवर्तन के कारण लोगों के आर्थिक स्थिति में बदलाव आ गया है और इस आर्थिक परिवर्तन ने उनके परंपरागत जीवन शैली को काफी हद तक प्रभावित किया है| यह स्थिति सामाजिक अव्यवस्था की है| परिवार बिखर गए है| यौन बीमारियां, नगरीय अपराध और नशाखोरी जैसे कुप्रवृत्ति (bad tendency) में बढ़ोतरी हुई है| ऐसे परिवार का पारिवारिक माहौल बच्चों पर अनैतिक व्यवहार करने के लिए प्रभाव डालता है| 

पर्यावरण प्रदूषण का प्रभाव (Impact of environmental pollution)-

नगरीकरण और औद्योगिकरण ने पर्यावरण प्रदूषण का स्तर बहुत बढा दिया है| औद्योगिक संस्थानों का निर्माण, ऑटोमोबाइल्स का अत्यधिक प्रयोग, नाली - नालों और तथा सीवेज में आने वाला विषाक्त जल (Polluted water) आदि बच्चों में त्वचा, आंख यकृकी आदि से संबंधित तरह-तरह की बीमारियों को जन्म देते हैं|

सिनेमा का प्रभाव (Impact of cinema)-

नगरीकरण और आर्थिक परिवर्तन ने बच्चे, किशोरों, युवाओं सभी को सिनेमा की ओर आवश्यकता से अधिक आकर्षित किया है| आज सिनेमा, टीवी में अधिकांशत: दिखाई जाने वाली हिंसा, बलात्कार, अपहरण, ग्लैमर, नकली दुनिया आदि घटनाएं बच्चों में  यौन विकृतियां उत्पन्न कर रहे हैं तथा बच्चे बहुत ही जल्द इनके भ्रम जाल में फस जा रहे हैं| 

भौतिकवादी मूल्यों का प्रभाव (Impact of materialistic values)-

नगरीकरण और आर्थिक परिवर्तन ने भौतिकवादी मूल्यों को जन्म दिया है| वयस्कों के नैतिक , मानसिक और आध्यात्मिक प्रत्येक क्षेत्र में मूल्यों का हास एवं क्षरण हो रहा है जिसका प्रभाव पारिवारिक वातावरण और बच्चों की परवरिश शैली पर पड़ रहा है| अनुशासनहीनता, कर्त्तव्य एवं श्रम से विमुखता आदि विकृतियां बच्चों में विकसित हो रहे हैं|

कंप्यूटर का प्रभाव (Impact of computer)-

संचार माध्यमों के अनेकाएक कार्यक्रमों में हमारी संस्कृति और संस्कारों की नींव ही हिला दी है| घरों में प्रवेश कर चुकी इस दिमाग रहित मशीन का सबसे बुरा असर बच्चों पर हो रहा है| विडंबना यह है कि हमारे समाज में इन व्यापक खतरों पर कोई चिंता नजर नहीं आती| हमारे जीवन शैली में कंप्यूटर पूरी तरह पैर जमा चुका है| काम-काज से हटकर कंप्यूटर का उपयोग मनोरंजन के बड़े पैमाने पर किया जा रहा है| छोटे छोटे बच्चे  कंप्यूटर पर वार गेम (war game) खेलते हैं, स्पीकरों पर जोर जोर से बम-बर्षा, गोलीबारी आदि की आवाज सुनते हैं, बच्चों के इस मनोरंजन के आधुनिक साधन ने बच्चों में हिंसा के संस्कार भरे हैं| कहने को यह खेल मनोरंजन है लेकिन बच्चे भीषण युद्ध का वास्तविक मनोरंजन करते हैं| 

वंचन का प्रभाव-

नगरीकरण और बदलते आर्थिक परिवेश ने घर के वरिष्ठ सदस्यों को व्यवसायिक व्यवस्तता के साथ-साथ सामाजिक व्यस्तता भी पड़ोसी है| कुछ माता-पिता अपने बच्चों के भरण-पोषण को ही अपना परम कर्तव्य मानते हैं और उनके पास बच्चों के विकास का अवलोकन करने का समय नहीं होता| ऐसे में बच्चे संबंधों में महत्व से वंचित रह जाते हैं और अपने इस खालीपन को भरने के लिए वह साथियों और अन्य लोगों के प्रभाव या दबाव में आकर गलत राह पर चल देते हैं और इसके परिणाम स्वरूप वे मानसिक अस्वस्थता का शिकार हो जाते हैं|

आकांक्षा और महत्वाकांक्षा के महत्व का प्रभाव- 

नगरों की चमक दमक आकर्षण से प्रभावित होकर माता-पिता तथा बालक दोनों ही अपने ऊंची महत्वाकांक्षा पाल लेते हैं ऐसे में बालक उन महत्वाकांक्षाओं और आकांक्षाओं की पूर्ति ना होने पर निराशाजन्य भावों तथा कुंठाओ से ग्रसित हो  जाते हैं|

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