अंतःस्रावी तंत्र - Antahsravi Tantra - The endocrine system


अंतःस्रावी तंत्र

यह नलिका युक्त एवं नलिका विहीन ग्रंथियों का तन्त्र होता है, जिसमें विभिन्न ग्रन्थियों द्वारा स्रावित (Secreted) हार्मोन्स शरीर की क्रियाओं पर नियन्त्रण रखते हैं।

अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ नलिकाविहीन ग्रन्थियाँ होती हैं जिनका अध्ययन जीव विज्ञान की अन्तःस्रावी विज्ञान के अन्तर्गत किया जाता है।

अन्तःस्रावी विज्ञान का जनक वैज्ञानिक एडिसन को माना जाता है।

अन्तःस्रावी ग्रन्थियों से हार्मोन जैसे रासायनिक पदार्थ का निर्माण होता है।

हार्मोन

हार्मोन शब्द को स्टारलिंग तथा बेलिस नामक वैज्ञानिकों ने किया था।

हार्मोन जीव शरीर के अन्दर रासायनिक संदेशवाहक के रूप में कार्य करते हैं।

जैविक क्रियाओं को उत्तेजित करने वाले पदार्थों को हार्मोन कहा जाता है जिनका निर्माण प्रोटीन के अतिरिक्त कोलेस्ट्राॅल तथा अमिनो अम्ल जैसे पदार्थों से होता है।

मनुष्य के शरीर में निम्न अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ पायी जाती हैं जो इस प्रकार हैं। पीयूष ग्रन्थि (Pituitary Gland) थायराइड (Thyroid) ग्रन्थि, पैराथायराइड, थाइमस ग्रन्थि, एड्रिनल (Adrenal) ग्रन्थि लैंगर हैन्स की द्वीपिका (Islets of Langerhans) यौन ग्रन्थि (Sex Gland) आदि प्रमुख अन्तः स्रावी ग्रंथियाँ हैं। इनमें मात्र ‘लैंगरहैन्स द्वीपिका’ नलिका युक्त होती है। यह अन्तःस्रावी तन्त्र एवं पाचन यतन्त्र दोनों से सम्बद्ध है।

पीयूष ग्रन्थि (Pituitary)

यह मस्तिष्क के निचले भाग में स्थित होती है।

यह अन्य सभी अन्तःस्रावी ग्रन्थियों पर नियन्त्रण रखती है। इसी कारण इसे ‘मास्टर ग्रन्थि’ (Master Gland) कहते हैं।

इससे वृद्धि-हार्मोन्स, थायराइड उत्तेजक हार्मोन्स, फाल्किल्स उत्तेजक हार्मोन्स इत्यादि 11 हार्मोन्स निकलते हैं।

हार्मोन्स प्रोटीन तथा स्टीराएड (वसीय पदार्थ) से बने होते हैं जो जैविक प्रक्रियाओं का नियन्त्रण करते हैं।

पीयूष ग्रन्थि से निकलने वाले हार्मोन्स के प्रमुख कार्य- शरीर वृद्धि पर नियन्त्रण रखना, मादा में अण्डे (Eggs) तथा नर में शुक्राणु (Sperm) का निर्माण, दुग्ध-उत्पादन पर नियन्त्रण, शरीर में जल-संतुलन, उपापचय (Metabolism) पर नियन्त्रण रखना है।

पीयूष ग्रन्थि से निकलने वाले ‘वृद्धि-हार्मोन्स’ (Growth Hormon) के अधिक स्रावण (Secretion) की दशा में व्यक्ति अधिक लम्बा एवं कम स्रावण की दशा में बौना (Dwarf) होता है।

थायराइड (Thyroid)

इसे Tempo Of Life के नाम से जाना जाता है।

यह पीयूष ग्रन्थि के ठीक नीचे होती है।

यह शरीर में सबसे बड़ी अन्तःस्रावी ग्रन्थि है।

इससे निकलने वाले हार्मोन - ‘थायराक्सिन’ (Thyroxin) का मुख्य कार्य है- श्वाॅस-दर को नियन्त्रित करना।

‘थायराक्सिन’ में ‘आयोडीन’ नामक तत्व पाया जाता है।

इसी कारण ‘थायराक्सिन’ के अल्प स्रावण से ‘घेंघा रोग’ (Goitre Disease) हो जाता है।

‘थायराइड’ ग्रन्थि को एक अन्य नाम - ‘एडम एपिल’ से भी जाना जाता है।

पैरा थायराइड (Para Thyroid)

यह थायराइड के नीचे पाया जाता है। इससे स्रावित होने वाला ‘पैरा थ्रोमोन’ हड्डी में कैल्सियम एवं फास्फोरस की मात्रा को नियन्त्रित करता है।

एड्रिनल (Adrenal)

एड्रिनल ग्रन्थि को आपात कालीन ग्रन्थि (Emergency Gland) कहा जाता है।

यह वृक्क (Kidney) के ऊपर स्थित होती है।

इससे एड्रिनलीन (Adrenaline) हार्मोन का स्रावण होता है।

इस हार्मोन का मुख्य कार्य ‘कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा’ के उपापचय (Metabolism) पर नियन्त्रण रखना है।

भय और आवेश की स्थिति में अधिवृक्क ग्रन्थि (एड्रिनल ग्रन्थि) के अन्तस्थ भाग से अचानक स्रावित ‘एड्रिनलीन’ हार्मोन मनुष्य को विषम परिस्थितियों से सामना करने के लिए प्रेरित करता है।

इसे लड़ो या उड़ो हार्मोन कहा जाता है। यह इस हार्मोन का दूसरा कार्य है।

लैंगर हैन्स द्वीपिका (Islets of Langerhans)

ये अग्न्याशय में पायी जाती हैं।

यह एक ऐसा भाग है जो पाचन तन्त्र से अंग के रूप में जाना जाता है तथा अनतः स्रावी तन्त्र में ग्रंथि के रूप में जाना जाता है, जो मंड (Starch) ओर शक्कर की प्रतिक्रिया को नियन्त्रित करता है।

इसकी कमी से शक्कर रूधिर में चला जाता है जो कि रक्त के घनत्व को बढ़ा देता है, जिससे रक्त का दबाव ‘रक्त वाहिनियाँ’ में बढ़ जाता है, जो कि ‘ब्रेन हैमरेज’ एवं ‘हृदय आघात’ का कारण बन सकता है।

इसी प्रकार इन्सुलीन की कमी ‘रूधिर में शक्कर के स्तर’ को बढ़ाती है, जिससे ‘डायबिटीज’ ;मधुमेहद्ध नामक रोग होता है (‘डायबिटीज’ की स्थिति में-उच्च रक्त दाब; तनाव), हृदय आघात एवं ब्रेन हैमरेज की संभावना बनी रहती है।

यौन ग्रन्थि (Sex Gland)

यह 2 प्रकार की होती है :-

नर हार्मोन ग्रन्थि, इसे ‘टेस्टिस’ कहते हैं।

इसमें से 2 हार्मोन्स- टेस्टोस्टेरोन तथा इन्ड्रोस्टेरोन- निकलते हैं।

मादा हार्मोन ग्रन्थि, इसे ‘ओवरी’ कहते हैं। इससे 2 हार्मोन्स- एस्ट्रोजेन तथा प्रोजेस्ट्रेरान निकलते हैं।

एस्ट्रोजेन स्त्रियों में यौन परिपक्वता, स्तन ग्रन्थि का विकास और ऋतु स्राव का नियन्त्रण करता हैं

प्रोजेस्टेरान गर्भावस्था में नियन्त्रण रखता है। इसीलिए इसे ‘प्रिगनैन्सी हार्मोन’ भी कहते हैं।

एस्ट्रोजेन द्वितीयक लैंगिक लक्षणों के विकास के लिए उत्तरदायी होता है।


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